रविवार, 13 मई 2018

MOTHER'S DAY

                                   मातृ दिवस

     मदर्स -डे की शुरुआत 1860 में अमेरिका के वर्जीनिया में शुरू हुआ।  सिविल वार के बाद सैनिकों के परिवारों और पड़ोसियों को एक साथ मिलने और सारी मांओं को इकठा  हो कर भोजन बना कर एन्जॉय करने के लिये मनाया गया। 1914 में अमेरिका में नेशनल हॉलीडे घोसीत कर  मदर्स -डे मनाया जाने लगा। तब से ही सारे जगह अलग -अलग तरीके से मनाया जाने लगा। भारत में मई के दूसरे सप्ताह में मनाया जाता है। कोई गिफ्ट देकर कोई पार्टी करके अपने तरीके से मानते है।
     माँ तो बस माँ होती है सबों कोअपनी माँ दुनिया की बेस्ट माँ लगती है, और सभी माँ को अपना बच्चा सबसे अच्छा और प्यारा लगता है। एक बार राकेश टाटा गया और नानी को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया। माँ इतना खुश हुई ,बोली की जिन्दगी में पहली बार कोई फूल भेंट किया है। और राकेश को थैंक्स बोल कर आशीर्वाद की। अब माँ तो है नहीं बस सब बाते यादें बन कर ही रह गई  है।
    1 जनवरी को जब माँ से मिल कर वापस आरहे थे तो पता नहीं ऐसा लग रहा था की अब माँ से भेंट नहीं हो पायेगा। माँ भी आशीर्वाद(रुपिया ) देते हुए बोली ले रख अब जब रहेंगे ही नहीं तो कौन देगा। राजेश से मिलने का बड़ा मन था। और अन्त समय में राजेश के हाँथो से पानी पी। अच्छा हुआ राजेश नानी से मिल लिया। उनकी अंतिम इच्छा भी पूरी हो गयी।
   माँ बस अब तुम तो हो नहीं तुम्हारी यादे ही रह गयी। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।






सोमवार, 7 मई 2018

ONE MONTH

                               एक महीना
              देखते ही देखते माँ को दुनिया छोड़े एक महीना बीत गया। एक पल ऐसा लगता है की कल की ही तो बात है, और एक बार ऐसा भी लगता है की अरे माँ तो अब हमारे बीच है ही नहीं तो मन बड़ा भारी हो जाता है।माँ का फोटो देख कर ऐसा लगता है की माँ हमलोगों के बीच ही ही और अब कुछ बोलेगी। बस माँ का हँसता चेहरा ही दिखता है।  ऐसे में बाबा को अकेले छोड़ कर आना भी बहुत मुश्किल लगा, पर आना तो पड़ेगा  ही।दोनों भाई के ना रहने पर भी कम से कम माँ तो थी। अब माँ के जाने के बाद बाबा एकदम अकेले हो गए है। सोच कर भी बड़ा डर लगने लगता है। अब कर भी क्या सकते है। प्रभु इच्छाआगे भी अच्छा ही होगा।






शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

KUCH PAL BABA KE SATH

                                    कुछ पल बाबा के साथ

     अब माँ तो रही नहीं ,तो बाबा का ध्यान हमलोगों को ही रखना पड़ेगा। अभी तक तो बाबा का पूरा समय माँ के देख भाल में ही व्यतीत हो जाता था। अब जब की माँ नहीं है तो सारा समय बाबा का खाली ही रहता है। हम दोनों बहने बाबा को फिर से रूटीन में लाने का अच्छा तरीका निकाल लिये। बाबा का जिससे मन भी लगा रहे और समय का पता भी नहीं चले।
   सुबह शाम घर के पास गार्डन में टहलने अपने मित्रों के साथ गार्डन में बैठने भेजने लगे। घर के पास साईं मंदिर ,जुबली पार्क ,मॉल इत्यादी में घुमाने ले गए। काका के घर ले गए। बाबा भी खुश हमलोग भी खुश। अब माँ नहीं है बस बाबा का आशीर्वाद हमलोगों को मिलते रहे। बाबा का मन भी लगने लगा बाबा अपना लिखने पढ़ने के काम में भी व्यस्त हो गए।











बुधवार, 25 अप्रैल 2018

MY FIRST BOOK

                                    प्रथम पुस्तक
                             विश्व भ्रमण 30 वर्षों में


                 कभी भी सोचे भी नहीं थे की हम कुछ भी लिखेगें। बाबा के जोश दिलाने पर अपने भ्रमण का संस्मरण लिखना शुरू किये। लिखते -लिखते एक पुस्तक का रूप ले लिया। बस क्या था बाबा अपने पब्लिसर को ही भेज दिए और वह छप कर भी आगया। अपने 30 वर्षो के भ्रमण का कुछ खट्टी -मीठी यादें ,कुछ अनुभव ,जो कुछ नया दिखा बस यही सब लिखे थे। राकेश आईडिया दिया इसका शीर्षक विश्व भ्रमण 30 वर्षों में लीखिए। बस इसी नाम से पुस्तक बन गया।
      बाबा को बड़ा मन था की बाबा के जीते जी  ये पुस्तक छप कर आजाये जिससे बाबा देख सके। बाबा के रहते पुस्तक आया ,बाबा को बहुत पसंद भी आया ,पर दुःख की बात ये है की और पंद्रह दिन पहले यदि पुस्तक मिल जाता तो माँ  का भी आशीर्वाद मिल जाता।




सोमवार, 23 अप्रैल 2018

LAAST WISH

                          माँ की अन्तिम इच्छा

                बचपन से ही माँ को घर गृहस्थी के काम में ही लगे हुए देखे है। बस सबों का खाना -पीना ,सुख -सुविधा का ध्यान देना। अपने लिये कोई फरमाईस ,तीर्थ -व्रत ,घूमना ,खरीदना कुछ भी आर्डर नहीं करना। बस परिवार और काम।  माँ का एक ही इच्छा था की 14 -15 साल के उम्र में टाटा में दुल्हन बन कर आये है और अर्थी भी यहीं से निकले। कितना भी बोलो कहीं चलने ,किसी के भी घर जाने को तैयार नहीं थी। राजेश कितना नानी को चिढ़ाता था की नानी जुबली पार्क चलना है साफ नहीं कहती थी।जब से बिस्तर पकड़ी थी बस यही इच्छा था यही से दुनिया से विदा लेंगे ।अब टाटा से कहीं बाहर नहीं जायेंगे।  भगवान भी उनका मान रखे। पुरे श्रिंगार  में सज -धज कर अपने शादी का सिन्दूर बाबा के हाँथो से लगवा कर जुबली पार्क होते हुए ,स्वर्ग रथ में सवार हो कर इस दुनिया से  विदा हुई।
                             भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।  




गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

YADGAR PAL

                                    यादगार पल

                    माँ के साथ बिताया  हुआ कुछ मीठी -मीठी यादें ,बस यादें ही बन कर रह गया।
                              वे दिन तो अब नहीं लौटेगा ना माँ ही बस यादें ही यादें।









नाना 

मौसी 


माँ ,बुआ ,चाची 
 

रविवार, 15 अप्रैल 2018

MAA

                               माँ प्यारी माँ
                                 श्रद्धांजली

                         श्रीमती आशालता प्रसाद
              (    1 -1 -1936 -----9 -4 -2018 )

           मेरी प्यारी माँ के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित