सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

#CHHATTISGARH#TRIBAL#MUSEUM#SHAHEED#VEER#NARAYAN#SINGH#MEMORIAL#MUSEUM#NEW#RAIPUR

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                       छत्तीसगढ़  ट्राइबल म्यूजियम न्यू रायपुर 

                                  शहीद वीर नारायण  म्यूजियम 

                   नया रायपुर में 10 एकड़ में 50 करोड़ की लागत से एक डिजीटल संग्रहालय 2025 में बना है। भारत की स्वतंत्रता के लिये लड़ने वाले छत्तीसगढ़ के आदिवासी सेनानियों के साहस ,बलिदान और अटूट भावना को ये म्यूजियम सम्मानित करता है।शहीद वीर नारायण जी छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे।अंग्रेजो ने 10 दिसंबर 1857 में रायपुर के जयस्तंभ चौक में इन्हे फांसी दी थी।ये जमींदार परिवार से थे। 1830 से 1942 तक छत्तीसगढ़ के अलग अलग प्रान्त से स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था। जिसका वर्णन डीजीटल माध्यम से इस म्यूजियम में बहुत सुन्दर तरीके से दिखाया गया है।म्यूजियम जब तक नहीं देखे थे तब तक सिर्फ मंगल पण्डे ,शहीद  भगत सिंह ,नेहरू गांधी जी लोगो को ही आजादी की लड़ाई लड़े है यही पढ़ाया गया था।एकबार रायपुर वालों को ये म्यूजियम जरूर देखना चाहिए।म्यूजियम देख कर ही छत्तीसगढ़ के सेनानियों के बलिदान का पता चलता है। 
                म्यूजियम से आगे बढ़ने पर छत्तीसगढ़ के जन जातीय का म्यूजियम है जिसमे 650 से अधिक मुर्तीया है. य १४ गैलरी में यहाँ के जनजातियों के जीवन को प्रदिर्शित करता है। छत्तीसगढ़ के हर प्रान्त के खान पान  ,रहन सहन ,शिकार करने का तरीका ,खेती किसानी ,मतस्य पालन ,नृत्य संगीत ,आभूषण ,उपचार ,धार्मिक अनुष्ठान बस्तर का घोटुल सभी कुछ इतने अच्छे तरीके से मुर्तीयो के जरिये दिखाया गया है लगता है पुतला नहीं सच के इंसान ही है। 
       नया रायपुर का ये म्यूजियम वास्तव में देखने योग्य और सिखने तथा समझ ने लायक है। सोमवार को बंद रहता है बाकी मंगल से रविवार के दिन सुबह 10 से 5 बजे जा सकते है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         
                          







         


                                                                                                                                                            

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    






सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

#MANJACOMBAI#TEMPLE#NAGARAJA#TEMPLE#COONOOR


             मंजाकोम्बई  मदिर   नागराज  मंदिर 

                     नीलगिरी जिले के कुंदा में चाय बगानऔर जंगल  के बीच मंजाकोम्बई नागराजा मंदिर स्थित है। चारों तरफ शांत और सुंदर वातावरण है।मंजाकोम्बई में देवी मंदिर के लिये खोदाई के समय एक चट्टान आने पर खुदाई में अड़चन आने पर उसे हटाने पर एक आवाज आई और वहाँ नाग आकृति में एक पत्थर मिला। उसे स्वंभू नाग माना गया। वहां सुरंग था वहां नाग मंदिर बनाया गया। नागराज मंदिर के गर्भ गृह के भीतर एक जीवित सांप रहता है। इस मंदिर के मुख्य देवता भगवान नागराज है। साथ ही दो देवी मंदिर भी है। देवी हेथई अम्मा और देवी सन्तानलछमी  ।नाग मंदिर से सुरंग दोनों देवी मंदिर तक जाता है। 
              मंदिर प्राचीन है। इस मंदिर में हर साल एक मई और अमावस्या के दिन  विशेष पूजा होता है। करीब 50 हजार श्रद्धालु पूजा के लिये आते है।मान्यता है की संतानलक्ष्मी मंदिर में संतान प्राप्ति के लिये लोग पूजा करने आते है। मन्नत  पूरी होने पर वहां अग्निकुंड में अंगारो में चलते है। रामजी वनवास के समय यहाँ से गुजरे थे जंगल के बीच उनका पद चिन्ह अभी भी है।
          



शनिवार, 1 मार्च 2025

#MAHAKUMBH#MELA#PRAYAGRAJ#2025

                     महाकुम्भ मेला प्रयागराज 2025

        हर 6 साल में अर्धकुम्भ और हर 12 साल में पूर्ण कुम्भ प्रयाग में संगम में लगता रहता है। इलाहाबाद जाना आना लगा रहने के कारन कुम्भ और माघ नहाने का अवसर भी मिल ही जाता है। इस बार 6 महीने पहले से ही सोच रखे थे की 2025 का कुम्भ स्नान के लिये संगम जायेंगे। टिकट भी कटा था। पर बाद में पता चला की इस बार का कुम्भ बहुत ही स्पेशल है  जो की 144 साल में एक बार होता है।सोचे चलो अच्छा ही है  संगम में डुबकी लगा लेंगे। माघ लगा कुम्भ स्नान शुरू हुआ भीड़ भी बहुत होना शुरू हुआ। लोगों को जाम में भी फसना पड़ा पैदल भी चलना हुआ।भीड़ देख कर दो दो बार टिकट भी कैंसल करवाए। पर मन नहीं मान रहा था ,लगा अभी नहीं तो कब, गंगा मैया का नाम लेकर  प्रयागराज आखिर पहुँच ही गए।संगम स्नान भी हुआ। दिल बहुत खुश हुआ त्रिवेणी संगम का स्वच्छ निर्मल जल में डुबकी लगाना बड़ा ही अच्छा लगा।वोटिंग का भी मजा लिये। विदेशी पक्छियों के झुंडो को भी देखना अच्छा लगा।देशी तो देशी विदेशी मेहमान लोग भी महाकुम्भ मेले का आनंद उठाए।  

            कुम्भ स्नान का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही सैकड़ों साधु संतो को भी देखना होता है। बहुत सारा अखाडा लगा रहता है जो की आकर्षण का केंद्र होता है।गंगा में रोज करीब हजारो करोड़ों लोगो ने डुबकी लगाई।उप्र सरकार ने  बहुत ही अच्छा व्यवस्था करी थी। साफ सफाई से लेकर हर तरह का इंतजाम। इतने बड़े आयोजन में थोड़ा बहुत भगदड़ तो होता ही है। तीर्थ यात्रियों को थोड़ी असुविधा भी हुई ,फिर भी करीब 66 करोड़ लोग गंगा में डुबकी लगाई और इस महापर्व के महा आयोजन के गवाह बने।पूरा प्रयाग का नजारा भी अद्भुत था। जहाँ तक नजर दौड़ाओ तीर्थ यात्री ही जाते और संगम स्नान कर लौटते दीख रहे थे। प्रयाग निवासी भी तीर्थयात्रियों का बहुत साथ दिया। महीनो तक जगह जगह लंगर चलता रहा। अपने अपने सामर्थ से सभी सेवा किये।


           



        



रविवार, 30 जून 2024

#TEA#GARDEN#COONOOR

                          चाय बगान में परिवार संग मस्ती 

              कुन्नूर के चाय बगान में परिवार के साथ खूब घूमें। हम सबोने खूब मस्ती किया। अपने हाँथ से सबोने चाय की पत्तियाँ तोड़ कर घर लाये। चाय की पत्तियों से पकौड़ा बना कर खाये। जैसे पालक का पत्ता का बेसन लपेट कर पकौड़ा बनता है ,ठीक वैसे ही चाय की नरम पत्तियों से कुन्नूर में पकौड़ा बनाया जाता है। सबों को बहुत अच्छा लगा। नए लोग को नहीं बताने पर वे तो पालक का ही पकौड़ा समझेंगे। ठण्ड के मौसम में गरमा गरम चाय के साथ पकौड़ा खाने का मजा ही कुछ और है। 












बुधवार, 26 जून 2024

#NILGIRIS#SUMMER#FESTIVAL#SHOW

                    नीलगिरि समर फेस्टिवल शो 

            हर साल पुरे नीलगिरी डिस्ट्रीक्ट में मई के महीने में  जितने भी  गार्डन है ,वहाँ पर शनिवार और रविवार को हर हफ्ता अलग अलग थीम में शो होता है।कोटागिरी के गार्डन  में वेजीटेबल शो में वेजीटेबल से तरह तरह का आकृति बना होता है। गुडलूर के गार्डन में मसाला से आकृति बना होता है। ऊटी के रोज गार्डन में रोज शो में सैकड़ों वेराइटी का गुलाब देखने मिलता है। ऊटी के बॉटनीकल गार्डन में अनेक वेराइटी का फूल और फूल से बना आकृति देखने मिलता है। अंत में मई के लास्ट रविवार को कुन्नूर के सिम्स पार्क में फ्रूट शो होता है। यहाँ भी फलों से तरह तरह का जीव ,जन्तु  का आकृति बना हुआ देखते ही बनता है। शो समाप्त होने के बाद सारे फल ,सब्जी से जैम, जेली अंचार आदि बनाने के उपयोग में लिया जाता है। हमारे घर के पास ही सिम्स पार्क होने के कारन हर साल समर फेस्टीवल का आनंद उठा पाते है। ऊटी हिल स्टेशन होने के कारन पुरे मई जून के महीने में लाखो टूरिस्ट घूमने आते है और समर फेस्टीवल का आनंद उठाते है।



 











 

सोमवार, 24 जून 2024

#SIDHAGIRI#SHIRDI#SAI#BABA#TEMPLE#YEDAPALLI#COONOOR

                       साईं बाबा मंदिर एडापल्ली कुन्नूर 

          कुन्नूर के पास एडापल्ली गावं में, सिद्धगिरी पर्वत में, जंगल के बीच शांत एकांत वातावरण में  ,शिरडी के साईं बाबा का मंदिर है। मेन मंदिर में साईं बाबा का 7 फ़ीट ऊँचा मार्बल का मूर्ती है। मूर्ती के सामने स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। मंदिर बने करीब 15 साल हो गया है। मंदिर के प्रांगण में एक कृष्ण जी का धातु का बड़ा सा मूर्ती है। प्रांगण के चारो तरफ सारे देवी देवता विराज मान है। पंचमुखी हनुमान जी ,विष्णु जी ,लक्ष्मी जी ,श्री यंत्र ,रामदरवार आदि है। गुरुवार को विशेष पूजा ,अर्चना ,आरती आदि मंदिर में होता है और प्रसाद वितरण होता है।कुन्नूर से 10 मिनट ही लगता है आने में पर आने के बाद बहुत ही अच्छा लगता है।  








शुक्रवार, 21 जून 2024

#THANTHI#MARIAMMAN#TEMPLE#COONOOR

              श्री थांथी मरियम्मन मंदिर 

                   अंग्रेजों के ज़माने में कुन्नूर जंगल के बीच में एक छोटा सा गावँ था। अंग्रेजो ने टेलीग्राम के लिये इस जगह  खम्भा लगवाया था जो आज भी मंदिर के प्रांगण में  है।एक भक्त को स्वप्न में देवी प्रगट हुई थी ,वहाँ खोदाई करने पर देवी माँ का मूर्ती मिला जिसे स्थापित कर के मंदिर बनवाया गया। इसलिए देवी को स्वम्भू माना जाता है। मंदिर प्राचीन और  छोटा जरूर है पर देवी जागृत लगती है। हमेशा पूजा होने के कारन भक्तों का ताँता लगा रहता है।  हर मंगलवार ,शुक्रवार ,नवरात्री ,दिवाली ,तमिल नया साल आदि विशेष पर्व त्यौहार में विशेष पूजा ,अर्चना होता है। जिस साल बारिश नहीं होता है तो भक्त पूजा अर्चना करते थे तो बारिश होता था इसलिए देवी को बारिश की देवी भी बोला जाता है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिये पूजा करने आते है और फल पाते है।