बुधवार, 2 सितंबर 2026

#KOTOR#MONTENEGRO

                       कोटोर        मोंटेनेग्रो 

            हम मोंटेनेग्रो के कोटर सिटी पहुंचे। यहाँ का पहाड़ नीग्रो जैसा काला होने के कारन ही शायद इस देश का नाम मोंटेनेग्रो पड़ा होगा। कोटोर समुंद्र तट पड़ बसा सुन्दर शहर है। एक तरफ पहाड़,और घुमावदार रोड ,रोड के दोनों तरफ अनार का फलदार पौधा।चर्च माकन सब पहाड़ में बसा हुआ। समुन्द्र के किनारे किनारे पूरा मछुआरों का जाल डाला हुआ था। यहाँ मछली पालन का काम ज्यादा होता है। पोर्ट और सिटी एक दम आमने सामने जहाज से निकलो रोड पार करो और सिटी का नजारा देखो। मेला लगा हुआ बाजार लाल पत्थर का टाइल्स कैफे ,रेस्टुरेंट टूरिस्ट का भीड़ यही सब था। यहाँ पालतू  बिल्ली  हर गली दुकान में देखने मिला।बस से 2 -3 घंटा पहाड़ में बसा शहर घूम कर वापस पोर्ट में  आकर रोड के उसपर ओल्ड सिटी घूम घाम कर वापस जहाज में लौट  आये, आगे के मंजिल के  लिये हम चल पड़े। 


   




शनिवार, 29 अगस्त 2026

#CORFU#GREECE

                        कोर्फू    ग्रीस 

         हमारा जहाज ग्रीस के कोर्फू शहर में रुका।   कोर्फू ग्रीक आइलैंड में लोनियन सागर तट पर बसा है। यूरोप के बाकी शहरों के जैसा यहाँ भी वही कंक्रीट की गलियाँ कैफे टूरिस्टों का चहल पहल देखने मील जायेगा। सप्यानॉयड स्क्वैर ,चर्च ,पैलेस। हरा भरा सिटी नीला -हरा सागर। बलुआ पत्थर। लम्बा समुद्र तट ,तैरने योग बीच आदि। हॉप ऑन हॉप ऑफ बस से 2 घंटा घुमलो काफी है। हमलोग वापस अपने जहाज में आगे की यात्रा के लिये लौट आये। 






बुधवार, 26 अगस्त 2026

#MESSINA#SICILY#ITALY

                       मेसिना   सिसली   इटली 

              हमारा जहाज सिसली के मेसिना में आकर रुका। सिसली भी एक बंदरगाह वाला शहर है। 730 ईस्वी से व्यापार का केंद्र रहा है। इसे टनल का शहर भी कह सकते है। पोर्ट से ओल्ड सिटी जाने में टनल ही टनल से जुड़ा है। ये भी ऐतिहासीक शहर है। यहाँ रोड के किनारे संतरा ,और नीम्बू का पौधा देखने मिला।,फलदार पौधा चारो ओर भरा पड़ा था। यहाँ चर्च ,मेसिना कैथेड्रल ईसाबेला समुद्र का तट प्रमुख है। 
          पोर्ट के सामने एक बड़ा सा चौक है जहाँ बहुत बड़ा चर्च है।इसकी खासियत ये है की चर्च के मीनार में बड़ा सा घड़ी है जैसे ही दिन का 12 बजता है वैसे घड़ी का 12 बार घंटा बजता है। इसके बाद घड़ी के ठीक नीचे एक गोल्डन बड़ा सा शेर है जो की जोर जोर से दहाड़ता है। फिर उसके नीचे एक गोल्डन बड़ा सा मुर्गा है जो की जोरदार बांग देता है। इसके नीचे एक महल निकलता है जोकि घूमता है।इस नजारा को देखने सारे टूरिस्ट पहले से ही खड़े हो जाते है की कब बारह बजे और कब इतना मजेदार नजारा देखने मिले।


  

  

      

सोमवार, 24 अगस्त 2026

#SPAIN TO #ROMA BY CRUISE

                   बार्सिलोना  स्पेन से रोम की यात्रा क्रूज द्वारा 

                              बार्सिलोना से रोम की १५ दिनों की जल यात्रा 

                                     सालेर्नो         पहला पड़ाव 

               हमारा जहाज पूरा दिन और रात पानी में चलता रहा। 27 जुलाई से चल कर 29 की सुबह इटली के सालेर्नो  शहर में रुका। दिन भर घूम कर दोपहर में वापस आना था।सालेर्नो दक्छिन इटली का बंदरगाह का शहर है। इटेलियन मार्बल यहाँ से निकलता है कैल्सियम ,चूना पत्थर का पहाड़ होने के कारण  मार्बल ,टाईल्स ,सेरेमिक यहाँ से सारे दुनिया में जाता है। अभी तक इटालियन मार्वल के बारे में सुनना होता था इसका चट्टान देखने मिला पहाड़ के ऊपर शहर बसा हुआ है वहाँ मरमेड मछली की रानी का बड़ा सा मूर्ती था। पुरे रोड के दोनों तरफ सिर्फ और सिर्फ तरह तरह का सेरेमिक का सामान बनते देख सकते है। एक से एक सेरेमिक का खिलौना ,बर्तन आदि भरा हुआ था। टूरिस्टों का अच्छा बाजार था। यहाँ से मार्वल,सेरेमिक,और टाईल्स वगैरा सब देश विदेश जाने के कारन बंदरगाह काफी विजी रहता है रोड में कंटेनर का आना जाना या टूरिस्टों का भीड़ देखने मिला। बंदरगाह से पहाड़ में बसा शहर तक चारो तरफ रंग बिरंगी कनेर ही कनेरका फूल  देखने में बड़ा अच्छा लग रहा था।दोपहर को घूम कर वापस जहाज में आ गये। शाम को हमारा जहाज आगे के  पड़ाव केलिये  निकल पड़ा


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शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

#BARCELONA#SPAIN#EUROPE

                                          बार्सिलोना    स्पेन 

              बार्सिलोना उत्तरपूर्वी स्पेन के तट पर स्थित दूसरा सबसे बड़ा शहर  है।यह भुमध्य सागर के तट पर बसा है। दुनिया भर के पर्यटक यहाँ घूमने आते है। यहाँ स्पेनिस भाषा चलता है और यहाँ का मुद्रा यूरो है। रोमन,इस्लामी शासन 1492 में समाप्त कर कैथोलिक ईसाई राज्य बना। .1986 में यूरोपीय संघ EU में सामील हुआ। 
              स्पेन  कला ,इतिहास ,संस्कृति ,फुटबॉल आदि के लिये जाना जाता है।टोमॅटीना (टमाटरफेस्टीवल ),बूल फाईटींग (सांड रेस)के लिये विश्व प्रसिद्ध है।दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल क्लब कैंप स्टेडियम यहीं है।
 सग्रादा फॅमिला बार्सिलोना में एक विशाल और प्रसिद्ध रोमन कैथोलिक चर्च है। जिसका निर्माण १४४ साल से अधिक वर्षों से चल रहा है। एंटोनी गौड़ी नमक प्रसिद्ध स्पेनी वास्तुकार ने चर्च का डिजाइन किया था। 1882 में नींव रखी  गई थी तब से लेकर आज तक इसका निर्माण चल रहा हे। 
 


                        सग्रादा फॅमिलीया 






 
    

 

बुधवार, 18 मार्च 2026

#VINDHYAVASINI#BILAI#MATA#TEMPLE#DHAMTARI#CHHATTISGARH

                                बिलाई माता मंदिर 

          धमतरी के रुद्री डैम के पास बजार के बीच 250 साल पुराना जागृत  देवी मंदिर है। दोनों नवरात्री में यहाँ ज्योत जलाया जाता है।आज जहाँ देवी मंदिर है ,वहाँ घना जंगल था। माना जाता है की 250 साल पहले कांकेर नरेश घोड़े से अपने दल वल के साथ जंगल भ्रमण केलिये  निकले थे। रास्ते में जंगल के बीच घोडा विदक गया ,आगे नहीं जा रहा था तो उनलोगो ने वहां एक पत्थर देखे। पत्थर को घेर कर जंगली बिलियाँ थी उन्हें भगाया गया और पत्थर हटाने की बहुत कोशिश किया गया पर पत्थर नहीं हटा पाए। फिर राजा ने वहाँ एक मंदिर वनवा दिया।  
             माना जाता है की यशोदा जी की पुत्री योग माया कृष्ण जी की बहन माँ विध्यवासीनी यही थी।धरती से प्रगट होने के कारन माता विन्ध्यवासनि और बिलियों के पत्थर के पास होने के कारन बिलाई माता नाम पड़ा।राजा को जहाँ पत्थर मिला था वहीं छोटा सा मंदिर बनवाये थे। धमतरी की चंद्रभागा बाई ने मंदिर में मनौती मानी  थी पूर्ण होने के बाद 1917 में मंदिर का जीर्णोद्वार करवाया।दुबारा मंदिर बनवाने पर मूर्ती को वैसे ही रहने दिया गया जिस कारन दरवाजे के सामने के बदले बगल से मूर्ती दीखता है। देवी का चेहरा बहुत  ही मन भावन है। 
       राजा नरहरदेव ने उत्तर प्रदेश के सरयू नदी के तट से ब्राह्मण पुजारी को आमंत्रित कर पूजा हेतु बुलाया था। तब से अब तक मंदिर में पारी पारी पीढ़ी दर पीढ़ी उसी पुजारी के वंशज पूजा पाठ सम्पन्न करवा रहे है। 
रुद्री डैम के पास होने से धमतरी आकर महानदी में बना हुआ डैम का नजारा भी देखना हो जाता है और देवी माँ का दर्शन भी हो जाता है। महानदी का जल ओडीशा तक जाता है।

  




शुक्रवार, 13 मार्च 2026

#MAA#ANGARMOTI#MANDIR#DHAMTARI#CHHATTISGARH

                                                   माँ अंगारमोती मंदिर 

                   छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला में गंगरैल डैम के किनारे माता अंगारमोती का 500 साल पुराना  जागृत  मंदिर है। अंगीरा रिषी की पुत्री होने के कारन अंगारमोती नाम पड़ा। महानदी में डैम बनने के पहले 52 गांव यहाँ था। तभी से माता 52 गावों की इष्ट देवी है।माता वट के पेड़ के नीचे विराजमान है। यहाँ गांव वाले मन्नत मांगने  आते है और मन्नत पूरा होने पर बकरा का बली आज भी दिया जाता है। और नारियल बांध कर जाते है। मंदिर परिसर में हजारों नारियल बंधा है।
       लोग बाग रायपुर से गंगरैल डैम घूमने धमतरी आते है और,बोटिंग करते है ,माता का दर्शन भी हो जाता है। यहाँ छत्तीसगढ़ टूरिजम का बहुत ही अच्छा कॉटेज नदी के किनारे बना है वहाँ रुकना भी हो जाता है। रायपुर से धमतरी 70 किलोमीटर की दूरी होने के कारन आराम से बाई रोड आकर घूम कर जा सकते है।वोटींग का भी अच्छा इंतजाम है।