शनिवार, 22 अगस्त 2015

CHAMUNDESHWARI TEMPLE

SUN,23 AUG

                                                                  चामुंडेश्वरी मंदिर 

                     कर्नाटक के मैसूर राज्य में शहर से 13 किलोमीटर की दूरी में चामुंडी हिल में चामुंडेश्वरी का मंदिर बना हुआ है। द्रविड़ स्टाईल में माँ दुर्गा का मंदिर है। कर्नाटक क्या सारे देश से जो भी मैसूर घूमने आते हैं वो मंदिर जरूर देखने जाते हैं। बहुत ही सुन्दर बना है। चारो और पहाड़ ,जंगल से घिरा है। ऊपर से मैसूर का दृश्य बड़ा अच्छा दिखता है। 101 सीढ़ी चढ़ने के बाद ही मंदिर जा सकते है। वैसे तो 2 -3 बार मैसूर से गुजरना हुआ पर आखिर इस बार मंदिर जाना हो पाया और देवी का दर्शन कर पायें। 

SAT,22 AUG

                                                       चार महीना कुन्नूर का 




                        4 महीने के बाद आखिर घूमते हुए रायपुर आही गये।कुन्नूर से बड़ा ही भारी मन से चले थे ,बहुत सारी खट्टी मीठी याद लेकर। बंच्चों के साथ नोक झोंक ,मस्ती करते हुए कैसे 4 महीना बीत गया पता ही नहीं चला। कुन्नूर से बांदीपुर होते हुये कर्नाटका होते हुए रायपुर आना हुआ। बांदीपुर के जंगल में तरह -तरह के जानवर देख कर मन प्रसन्न हो गया। कुन्नूर में तरह -तरह के फूल भी देखने मिला ,छोटी -छोटी चिड़ियाँ चाय बागान की सुंदरता। सब मिला कर मजे में समय बीत ही गया। अब अगले साल ही फिर जाना हो पायेगा। दो बेटा दो घर बस दोनों जगह घूमते आते जाते दिन बीत जाता है।  

मंगलवार, 11 अगस्त 2015

A CUP OF TEA

WED,12 AUG

                                                                         एक प्याली चाय 

                          सुबह की चाय की चपास हर को होती।है। अँग्रेजों का दिया नाम बेडटी ,पहले लगता था ये क्या बात सुबह बासी मुहँ कोई कैसे चाय पीयेगा ओभी बिस्तर में ,रायपुर में तो सुबह की चाय बरामदे में झुला में बैठ कर पीना अच्छा लगता है। चाय पीते -पीते फुआरा देखना ,पौंड में तैरती रंगबिरंगी मछलियों को देखना। नील कमल देखना बड़ा अच्छा लगता है। 
         कुन्नूर में ठंड होने के कारण बेड में चाय पीने का मजा अलग है। सुबह खिड़की खोल कर ताजी हवा आने पर जंगली फूल का खुशबु लेना ,छोटी -छोटी तरह -तरह की चिड़ियों को फुदकते देखना बड़ा अच्छा लगता है। अब समझ आया सुबह की चाय को बेड टी क्यों बोला जाता है। ठंडी जगह में बेड में ही चाय पीना कितना आनंद का काम है। 




बुधवार, 5 अगस्त 2015

MY BIRTHDAY GIFT

THU,6 AUG                              मेरा जन्म दिन का गिफ्ट 

                               जन्म दिन में हर साल की तरह केक भी काटे, फूल भी मिला, पार्टी भी परिवार के साथ मनाये। पर सबसे मजा तब आया जब मेरी बचपन की सहेलीका फ़ोन नम्बर हमको पता चला और उससे हम बात किये। 1 9 77 के बाद अब जाकर 20 15 में हमलोग फिर से जुड़ पाये। ये सब फेसबुक के कारण हो पाया। उस ज़माने में फ़ोन का साधन नहीं होने के कारण हमलोग का कांटैक्ट ही नहीं हो पाया। हमलोग स्कूल -कॉलेज साथ पढ़े और शादी के बाद हम रायपुर और हमारी सहेली चंडीगढ़ चलीगई। 2 -4 साल तो पत्र व्यवहार भी हुआ। हम चंडीगढ़ भी उससे मिलने गए। फिर धीरे -धीरे पत्र कम होने लगा। हमलोग अपने -अपने घर परिवार में व्यस्त रहने लगे। 
         जन्म दिन के दिन ही फोन नम्बर पाकर हम बहुत खुश हुए मेरे लिये सबसे बढ़िया गिफ्ट था इससे अच्छा और क्या हो सकता है। मेरी सहेली का भतीजा का बहुत -बहुत शुक्रिया हम दोनों सहेली को मिलने का। 





मंगलवार, 4 अगस्त 2015

MY BIRTHDAY

WED,5AUG

                                                 जन्म दिन आया 

                  जन्म दिन फिर आगया  ,हर साल की तरह इस बार भी आही गया अब इस उम्र में क्या जन्म दिन क्या सादा दिन हर साल की तरह फिर आया। वही रूटीन खाओ पीओ घुमो बस यही ,कुछ खास करने का नहीं। पढ़ने ,लिखने और गार्डनिग का शौक है बस यही सब चलते रहता है। 
उम्र के इस पड़ाव में और क्या। दोनों कुल में नाम ,इज्जत ,मान -सम्मान सब है और क्या चाहिए  भरा पूरा घर और सुन्दर परिवार भगवान का लाख -लाख शुक्रिया ये सब  देने का। अपने बचपन को जरूर याद कर ही लेते है। 
                                                                 हम  तब  और अब 










LORD KARTIK TEMPLE

TUE,3 AUG

                                                      भगवान कार्तिक (मुरुगन )

                        कुन्नूर  में   हमारे घर के सामने एक पहाड़ है ,पहाड़ क्या चारो तरफ चाय बगान और खुब बड़ा बड़ा सैकड़ों साल पुराना पेड़ है। और पेड़ों से घिरा हुआ एक प्राचीन मंदिर है। 5 0 -6 0 साल पुराना कार्तिक भगवान का मंदिर है। हमारे घर से मंदिर के शिखर का झंडा और रात को जलता हुआ लाइट दिखता है। एक दो बार जाने का कोशीश भी किये और ऊपर गए भी पर कठिन चडाई भी है और दर्शन भी नहीं हो सका। आखिर इस बार कुन्नूर आने पर मंदिर जाने का मौका भी मिला और दर्शन तथा पूजा भी करना हो सका। 
                   भगवान गणेश और कार्तिक का कहानी तो सभी हिन्दू जानते ही है। गणेश जी अपने माता -पिता का परिक्रमा कर के आशीर्वाद और फल प्राप्त कर के खुश हो गये थे और उनके बड़े भाई कार्तिक जी विश्व भ्रमण कर देर से लौटने के कारण अपने माता -पिता से नाराज हो कर दक्छिन दिशा की ओर चले गये थे। तब से ही दक्षिण में कार्तिक का ही मेन  मंदिर होता है और पूजे जाते हैं और गणेश का साइड में एक छोटा सा मूर्ती होता है। पूस महीने के पूर्णिमा में कार्तिक का स्पेसल पूजा होता है। पलनी (फ्लनी )में कार्तिक जी आये थे इसलिए कार्तिक जी का सबसे बड़ा और सुन्दर मेन मंदिर पलनी में है। सारे तमिलनाडु में पहाड़ के ऊपर जैसे उतर भारत में देवी का मंदिर होता है ,वैसे यहाँ कार्तिक का।
 कल उतर भारत में सावन होने  के कारण  सारे शिवालय में शिव भक्तों का ताँता था  वहीं यहाँ ऑडी  मास होने के कारण कार्तिक मंदिरो में भी पूजा था जिस कारन हमलोगों को भी दर्शन हो गया।



रविवार, 2 अगस्त 2015

PICNIC PARTY

SUN,2 AUG

                                                   पिकनिक बचपन का 

                     आज बच्चे लोग पिकनिक गये। सुबह उनकी तैयारी देख कर अपना बचपन का पिकनिक याद आगया। उनको भी बताये की हमलोग बचपन में पिकनिक जाते थे। डंड के महीने में तो वैसे सबों का मन पिकनिक मानाने का होता है। हमलोग भी हर  साल रायपुर में पुरे परिवार और रिश्तेदार के साथ अपने फार्म हाउस में वन भोज का आयोजन करते है। सबों को इंतजार भी रहता है की कब दिसम्बर आये तो ( नानी,दादी ,मामी )पिकनिक का प्रोग्राम हो।
                         आज एक -एक कर बचपन का सब बात याद आते जारहा है। टाटा में डिमना डैम और जुबली पार्क दो जगह सबों का पिकनिक का फेवरेट पसंदीदा जगह है। बाबा का डिपार्टमेंट का और हमारे पुरे परिवार का पिकनिक जरूर होता था। डिपार्टमेंट का पिकनिक डिमना लेक में या चांडिल ,रांची के दसम फॉल वगैरा कहीं भी एक स्पॉट में होता था। हमलोग सुबह 5 बजे ही तैयार होजाते थे 6 बजे टेल्को कंपनी का ट्रक हर स्टैंड से सबों को पिक करते जाता था जिससे हमलोग 8 बजे तक पिकनिक स्पॉट पहुंच जाये। फिर तो दिन भर एकदम हर चीज का छुट खाओ ,पीओ अपना -अपना दल बनकर जंगल घुमो मजे करो। जंगल जलेबी (गंगा इमली )तोड़ो बेर तोड़ कर खाओ बस  शाम को फिर खाना पीना ,चाय नास्ता सब हो जाने पर  फिर ट्रक में बैठ कर वापस टेल्को जाना। ट्रक का सफर भी मजेदार रहता था। स्कूल कॉलेज तो बस में और परिवार के साथ कार में घूमना और ट्रक में सारे लोग एक साथ हला मचाते मस्ती करते जाना का मजा ही कुछ और ही होता था। 
                         बाबा के चारो भाईयो के परिवार के साथ भी हमलोग पिकनिक जाते थे उसका मजा भी कुछ कम नहीं होता था।दादा -दादी ,काका -काकी ,सारे भाई -बहन बस फिर क्या बात मजा ही मजा। 
जुबलीपार्क माँ -बाबा 


दादा -दादी ,मीरा दीदी (बुआ )

बाबा सब भाई -बहन 

लेक 

डिमना रोड 

डिमना लेक 

बाबा रीता ,हम टेल्को डिपार्टमेंटग्रुप फोटो