रविवार, 15 दिसंबर 2019

GAJANIA FLOWER

                               गजानिया फूल

      गजानिया का पौधा मूल रूप से दक्षीण अफ्रीका का फूल है। ये एक बारहमासी पौधा है। इसे कम से कम  पानी और ज्यादा से ज्यादा धुप चाहिए।सुबह सूर्योद के साथ खिलना शुरू होता है और दोपहर बाद बंद होने लगता है। इसका फूल कई रंगो में होता है। ये बड़े डेजी के आकार का होता है और एक बार फूल खिला तो महीनो लगा रहता है। गमले के बदले जमीन में क्यारी में लगाना ज्यादा अच्छा होता है। रंगबिरंगी फूलों से क्यारी हमेशा भरा रहता है। लाल ,पीला ,बैगनी ,भूरा ,सफ़ेद इत्यादी रंगो में फूल खिलता है। आजकल नर्सरी में आसानी से मील जाता है।






शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

PATHARCHATTA KALANCHOE

                            पथरचट्टा   ( कलान्च  )

        भारत के सभी राज्यों में पाया जाने वाला औषधीय गुणों से भरपूर पथरचट्टा का पौधा होता है। वैसे मेडागास्कर इसकी उत्पति स्थल है। वहीं से पुरे एशिया के अलावा ऑस्ट्रेलिया ,न्यूजीलैंड,वेस्टइंडीज आदि देशों में पाया जाता है। आर्युवेद के अनुसार पथरी के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है, इसलिए इस पौधा का नाम पत्थरचट्टा पड़ा। बहुत बीमारीयों में इसके पत्ते से दवाई बनाया जाता है।
    देशी पथरचट्टा का पौधा 2 -3 फ़ीट हाईट का होता है और इसके पत्ते से अनेक पौधा निकलता रहता है। ठण्ड में एक बार फूल भी होता है। फूल बहुत ही सूंदर अंगूर के गुच्छे जैसा गुलाबी लिये होता है। और महीनो तक टीका रहता है। पौधे का कुछ ज्यादा देखभाल भी नहीं करना पड़ता है। जहाँ जहाँ पत्ती गिरता है वहीं नया पौधा तैयार हो जाता है।साल भर हरा भरा रहता है।इसका पत्ती भी थोड़ा बड़ा और सुन्दर दीखता है। 
   आजकल इसका भी कई रंगो वाला हाईब्रीड पौधा नर्सरी में मील जाता है। पौधा छोटा करीब एक फ़ीट का होता है और फूल गुच्छों में होता है।हाईब्रीड पौधा का पत्ती देशी के अपेक्छा छोटा होता है.इसका फूल  लाल ,पीला ,गुलाबी आदि रंगो में होता है और देखने में भी सुन्दर लगता है। ठण्ड में खिलता है और 2 -3 महीना फूल होते रहता है पर पौधा बहुत ही नाजुक होता है और साल भर उचित देख भाल नहीं करने पर अगले साल नहीं बचता है।


      

बुधवार, 11 दिसंबर 2019

VAJRADANTI , PORCUPINE ,BARLERIA PRIONITS,KATE KORANTI

                        वज्रदंती    ( काटे कोरंटी )

          वज्रदंती का पौधा पुरे भारत में पाया जाता है। भारत के अलावा श्री लंका और अफ्रीकन देशों में भी होता है।  इसका फूल 5-6  रंगों में होता है। पीले रंग का फूल वाला वज्रदंती का  पौधा थोड़ा कटीला होने के कारण इसका नाम कांटे कोरंटी भी है और अंग्रेजी में पोर्क्यूपिन कांटे वाला जीव के नाम पर इस पौधा को पॉर्क्यूपिन  भी बोला जाता है।
      पीला फूल वाला पौधा में बरसात के बाद ओक्टुबर से फरवरी तक खूब फूल होता है। इसका पीला फूल कार्तिक मास में भगवान को भी चढ़ाया जाता है और सोना दान जैसा महत्व बताया गया है।
 सफ़ेद ,नीला और वैगनी रंग वाला फूल दिसम्बर से पुरे ठण्ड में खिलता है इसलिए इसे दिसम्बर फ्लावर भी बोला जाता है।अलग रंग अलग मास में खिलता है पर इसका पूरा पौधा ही मेडिसिन बनाने में उपयोग किया जाता। आयुर्वेदिक में भी इसका बहुत महत्व बताया गया है। जैसा की नाम है वज्रदंती दांतो के दवाई में भी उपयोग होता है दांत को वज्र के सामान मजबूत करता है। दांत के अलावा आयुर्वेदिक में बहुत सी बीमारियों के इलाज में वज्रदंती के पौधे से दवाई बनाई जाती है ।
   इतना महत्वपूर्ण पौधा होने के कारण ही इसे सोना दान का महत्व दिया गया होगा ,जिससे लोग पौधा का सही देख रेख करे। पौधा लगाना भी बहुत ही आसान है एक बार लगा दो तो पौधे के नीचे फूल गिरने पर अनेक छोटे पौधा उग जाता है। उसे अपने सुविधा अनुसार बार -बार जगह -जगह लगाते जाओ और बढ़ाते जाओ। जब फूल होता है तो पौधा पूरा फूल से ढँक जाता है बगीचे का शोभा भी बढ़ जाता है।फूल का खासियत भी है ,सुबह फूल तोड़ कर भगवान को चढ़ाने पर दूसरे दिन भी फूल खिला रहता है। अधिकतर फूल दूसरे दिन मुरझा जाता है। इस गुण के कारण पौधा हर समय फूल से लदा रहता है।  मेरे पास तो सफ़ेद और पीला फूल वाला ही पौधा है पर फूल के मौसम में गार्डन का रौनक देखते ही बनता है।






 

रविवार, 8 दिसंबर 2019

ORCHID FLOWER

                                   आर्किड फूल

     आर्किड करीब -करीब संसार के सभी ठंडे जलवायु में पाया जाता है। भारत में हिमालय और पश्चिमी घाट के कोडईकनाल और नीलगिरि पर्वत में पाया जाता है। आर्किड ५०० प्रकार के और सैकड़ों रंगो में होता है। गमले या पेड़ में बांध कर लगा सकते है। जंगलो में किसी भी पेड़ में अपने आप फलता फूलता है।जंगली और देशी आर्किड का ज्यादा सेवा भी नहीं करना पड़ता है एक बार लगाने पर सालों साल खिलता और फैलता रहता है।
        आजकल नर्सरी में हाईब्रीड विदेशी  आर्किड का पौधा आसानी से मील जाता है और इसका फूल भी बहुत ही मनमोहक होता है। एक बार फूल आने पर महीनों खिला रहता है। पर इसका ग्रोथ थोड़ा स्लो होता है और देशी की  अपेक्छा इस का स्पेशिल केयर करना पड़ता है बहुत ही नाजुक होता है।मेरे पास देशी और विदेशी दोनों ही प्रकार का आर्किड है पर देशी का एक पौधा से अनेक पौधा बना चुके है पर विदेशी का स्पेशिल केयर करने के बाद भी उसका अनेक नहीं बन पाया है।पर जो हो गार्डन का रौनक तो बड़ा ही देता है।




    

बुधवार, 13 नवंबर 2019

CHILDREN'S DAY

                       बाल दिवस

              बाल दिवस 1925 से मनाया जाने लगा था।पर  UNA ने 20 नवम्बर 1954 को बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी।  पुरे विश्व में अलग -अलग दिन को बाल दिवस अलग तरीके से मनाया जाता है। हमारे देश में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी के 27 मई 1964 को निधन के बाद उनके  जन्म दिवस 14 नवम्बर को बाल दिवस मनाया जाने लगा।  । नेहरू जी को बच्चों से बहुत प्यार था ,उन्हें चाचा नेहरू बोला जाता है।इसलिए उनकी  जयंती पर बाल दिवस मनाया जाने लगा।
    कई स्कूलों में बाल दिवस में बाल मेला एवं प्रतियोगीता भी आयोजित किया जाता है। आज के बच्चे कल के भविष्य है ,इसलिए उनके शारीरिक और सेहत का ख्याल रखना ,पोषण और संस्कार का ध्यान रखना इत्यादी पर रंगा रंग कार्यक्रम भी होता है। बच्चों को चॉकलेट और मिठाईयां भी बांटी जाती है।

गुरुवार, 7 नवंबर 2019

BLOGSPOT.COM

                                ब्लॉग्स्पॉट.कॉम
                                       चिट्ठा जगत .इन

     ब्लॉग स्पॉट का आरम्भ 23 अगस्त 1999 में एक होस्टींग टूल के रूप में पायरा लैब्स ने की थी। सन 2003 में इसे गूगल ने खरीद लिया था ,और तब से यह इंटरनेट पर सबसे प्रसिद्ध शुल्क रहित होस्टींग वेब साइट बनी हुई है। ब्लॉग स्पॉट एक चिट्ठा होस्टींग सेवा है जो की गूगल ब्लॉगर प्रोग्राम के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है जिसके द्वारा ब्लॉगर्स  अपने ब्लॉग बनाते है। एक ब्लॉग किसी भी कार्य के लिये प्रयोग किया जा सकता है,चाहे वह निजी जीवन के रूप में हो या व्यापारिक कार्य के लिये या सामान्य रूप में अपने विचार को दूसरों तक पहुँचाने के लिये
ब्लॉगिंग का उपयोग किया जाता है, और वो भी अन्लीमेटेड।
      ब्लॉग पचासों भाषाओं में लिख सकते है। आलोक कुमार हिन्दी भाषा के प्रथम ब्लॉगर माने जाते है। उन्होंने ने 2007 में हिन्दी ब्लॉग लिखने का आरम्भ किया।
    हर साल ब्लॉगोत्सव मनाया जाता है और उसमे अच्छे 51 ब्लॉगर को सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया जाता है।मेरा अभी 450 ब्लॉग हो गया है। बच्चों ने मुझे ब्लॉग लिखने के काबिल बनाया है।



                            

शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

NILGIRI MOUNTAION RAILWAY

                         नीलगिरि पर्वत मे रेल का सफर

       दक्षीण भारत का टूरिस्ट स्पॉट ऊंटी तमिलनाडु का हिल स्टेशन नीलगिरी पर्वत श्रंखला में है।ऊंटी घूमने के वैसे तो कई तरीके है। लेकिन टॉय ट्रेन में बैठने का कुछ अलग ही आनंद है। दुनिया का सबसे पुराना भाप इंजन कोयला वाला ट्रेन यहाँ चलता है। 1908 में अंग्रेजों के काल का ट्रेन है।इस ट्रेन के ट्रैक में पुल ,सुरंग है ,वो भी सब अंग्रेजों के ज़माने का है।
    वैसे तो ट्रेन मेट्टूपालयम से सुबह 7 बजे चल कर कुन्नूर होते हुए ऊंटी दोपहर को पहुँचती है। ऊंटी से दोपहर 2 बजे चलकर कुन्नूर होते हुए शाम 5 बजे वापस मेट्टुपालयम पहुँच जाती है। ऊंटी घूमने वाले टूरिस्ट ऊंटी से कुन्नूर या कुन्नूर से ऊंटी इस टॉय ट्रेन मे सफर जरूर करते है। टूरिस्ट या तो फर्स्ट क्लास या सेकंड क्लास में सफर करते है और लोकल रोज आने जाने वाले पब्लिक जनरल बोगी से आना जाना करते है जिसका किराया भी बहुत कम है।
    कुन्नूर से ऊंटी जाने पर चारों तरफ घने जंगल ,पहाड़ ,चाय बागान ऊँचे -ऊँचे विशाल युकलिप्टुस का पेड़,झरना ,गुफा का नजारा देखते ही बनता है।कुन्नूर से ऊंटी जाने पर  7 स्टेशन से होकर ट्रेन गुजरती है।कुन्नूर ,वेलिंगटन ,अरुवांकडू ,केट्टी ,लवडेल ,फर्न हिल ,ऊंटी। वेलिंगटन में फौजी छानवी और 8 मार्केट है ,अरुवांकडू में कोडनेट फ़ैक्टरी है ,लवडेल में प्रसिद्ध लॉरेंस स्कूल है। ट्रेन मे बैठे -बैठे नजारा देखते हुए जाना टूरिस्टों को बहुत अच्छा लगता है। शहर के दौड़ भाग के जिन्दगी से कुछ पल शुकुन भरा होता है।
   इस ट्रेन का नाम यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज में दर्ज है।कुन्नूर ऊंटी के रास्ते में इस ट्रेन में बहुत सारा फिल्म का शूटिंग भी हमेशा होते रहता है। एक तो शांत एकांत वातावरण ,दूसरा कोई डिस्टर्ब भी नहीं करता और सीन सीनरी तो है ही कुन्नूर कोई गेस्ट आता है तो उनको घुमाने के बहाने खुद भी घूमना हो जाता है। टॉय ट्रेन का मजा मिल जाता है।वैसे कुन्नूर स्टेशन मे ब्रेकफास्ट भी बहुत ही बढ़िया मिलता है ,खुद भी खाओ और गेस्ट को भी खिलाओ मजा आजाता है।