गौ दान का महत्त्व
सभी दानों में महादान गौ दान को माना जाता है। माना जाता है की गौ में 33 करोड़ देवी देवता का वास है। ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश ,गौरी से लेकर सारे देवी देवता गाय के अलग अलग अंग में रहते है इसलिए गौ दान का इतना महत्त्व है। मरने के बाद मोक्छ की प्राप्ति होती है। मरने के बाद आत्मा को देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। पुण्य और पाप से मुक्ति मिलता है। सुख शांति मिलता है। इसलिए हमारे हिन्दुओं में गौदान का प्रचलन है।
गौदान भी बहुत तरह से करने की छूट है। शहरो में गाय पालन गोशाला में होता है अब ज्यादा घरो में पालते नहीं है पंडित जी को भी पालना भारी पड़ने लगा है ,इसलिए चाँदी की छोटी छोटी गाय ,सींग ,खुर सोनार के पास आसानी से मील जाता है. अपने सामर्थ अनुसार पंडित से संकल्प करवा कर फूल ,फल ,अनाज ,वस्त्र सारा सामान दान कर सकते है। गोशाला में सेवा कर के दान कर सकते है। कोई बंधन नहीं है। जिसकी जैसी परिस्थीती है ,जिसे जिसमे श्रद्धा हो वो वैसे गोदान करता है।माना जाता है की मरने के बाद गाय की पूछ पकड़ कर वैतरणी नदी पार करना होता है। इसलिए गौदान का इतना महत्त्व है।
हमलोग के मन में भी आया बाबा अब 100 साल के हो गए है बाबा के हाथ से भी गौदान करवा दिया जाय। बोलते है पितृ पक्छ में गौदान करना अति उत्तम माना जाता है। पितृ पक्छ चल ही रहा है। हमलोग पंडित बुला कर बाबा के हाथ से गौदान का संकल्प करवा दिए। बाद में पछतावा नहीं हो ,माँ का हमलोग नहीं करवा सके थे। बाकी तो प्रभु इच्छा ,क्या सच्चा क्या झूठा कोई देखने तो गया नहीं है। मन हुआ हो गया बस और क्या चहिये।





