मंजाकोम्बई मदिर नागराज मंदिर
नीलगिरी जिले के कुंदा में चाय बगानऔर जंगल के बीच मंजाकोम्बई नागराजा मंदिर स्थित है। चारों तरफ शांत और सुंदर वातावरण है।मंजाकोम्बई में देवी मंदिर के लिये खोदाई के समय एक चट्टान आने पर खुदाई में अड़चन आने पर उसे हटाने पर एक आवाज आई और वहाँ नाग आकृति में एक पत्थर मिला। उसे स्वंभू नाग माना गया। वहां सुरंग था वहां नाग मंदिर बनाया गया। नागराज मंदिर के गर्भ गृह के भीतर एक जीवित सांप रहता है। इस मंदिर के मुख्य देवता भगवान नागराज है। साथ ही दो देवी मंदिर भी है। देवी हेथई अम्मा और देवी सन्तानलछमी ।नाग मंदिर से सुरंग दोनों देवी मंदिर तक जाता है।
मंदिर प्राचीन है। इस मंदिर में हर साल एक मई और अमावस्या के दिन विशेष पूजा होता है। करीब 50 हजार श्रद्धालु पूजा के लिये आते है।मान्यता है की संतानलक्ष्मी मंदिर में संतान प्राप्ति के लिये लोग पूजा करने आते है। मन्नत पूरी होने पर वहां अग्निकुंड में अंगारो में चलते है। रामजी वनवास के समय यहाँ से गुजरे थे जंगल के बीच उनका पद चिन्ह अभी भी है।




